शिक्षाकर्मी चयन
संस्थान ने शिक्षा कर्मी बोर्ड, (शिक्षाकर्मी परियोजना संचालन की राज्य स्तर पर संस्थान) संधान (राजस्थान में जयपुर स्थित संदर्भ संस्था जिसे शिक्षाकर्मी परियोजना में अकादमिक कार्य की जिम्मेदारी दी गई थी) व पंचायत समिति के साथ मिलकर चयन की रूपरेखा तैयार की जिससे इन चयनित गांवो में षिक्षाकर्मी विद्यालयों की स्थापना एवं उनकी पूर्व की नाजुक स्थितियों के विपरित एकदम साफ सुथरे षैक्षिक माहोल को तैयार करने की रणनीति बनार्इ्र्र्र गई जिसमें मुख्य धुरी के रूप में षाला में पढाने वाले षिक्षाकर्मी को माना गया और उसमें अच्छे समाजसेवी परोपकारी सहृदयी व गांव में प्रतिष्ठित होने की अपेक्षा रखी गई और इसी सौच के साथ संस्थान ने षिक्षाकर्मी चयन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। षिक्षाकर्मी चयन में क्योकि यह क्षेत्र षिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ था अतः प्रथम तो यहॉ पढे+ लिखे युवक युवतियों का मिलना मुष्किल था और पढे+ लिखे मिले भी तो कम षैक्षिक योग्यता वाले मिले, इनके लिये षैक्षणिक कार्य करवाना चुनौति से कम नही था, साथ ही युवतियों का चयन करना तो एकदम असंभव था इन सब समस्याओं पर गहनता से चिंतन करते हुये संस्थान ने गांवो में बेैठके आयोजित करके लोगो को परियोजना के प्रति जाग्रत किया और उनकी सहभागिता से 1987 में 17 विद्यालयों षिक्षाकर्मी का चयन किया जिनमें 9 महिलायें थी और उनमें से 3 महिला जो पर्दा प्रथा को उस वक्त बहुत अहमियत देते थे, से थी। इस प्रकार परियोजना की औपचारिक षुरूआत हो पाई।